माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet

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jay
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माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet

Post by jay » 12 Feb 2015 22:14

माँ का आँचल और बहन की लाज़

फ्रेंड्स आपने मेरे द्वारा पोस्ट की गई कहानियो को काफ़ी सराहा है इसके लिए मैं आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ और अब आपके लिए एक और नई कहानी लेकर पेश हुआ हूँ दोस्तो जैसे कि आप जानते हैं कि मैं कोई लेखक नही हूँ ये कहानी आकाश ने लिखी है और मुझे जो कहानी अच्छी लगती है उसे आपके साथ शेअर कर लेता हूँ लेकिन इसका मतलब ये नही है कि मैं मेहनत नही करता अरे भाई कॉपी पेस्ट या हिन्दी मे कॅन्वेर्ट करने मे भी मेहनत लगती है हा हा हा हा हा हा हा हा शुउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउ हँसो मत यार अब मैं सीरियस हो जाता हूँ और कहानी की तरफ आता हूँ .............................दोस्तो................
माँ का आँचल कितने थोड़े से कपड़ों का है..पर कितना बड़ा सहारा देता है अपने बच्चो को...कभी .उसके अंदर की गर्मी..कभी .उसके अंदर की शीतलता तो कभी उसके अंदर की शांति ..क्या कहीं और मिल सकती है..?? कितना पवित्र , कितना निर्मल और स्वच्छ ...

पर वक़्त भी क्या क्या खेल खेलता है इंसानों के साथ ..यही पवित्र आँचल कभी कभी कितना मैला हो जाता है ... उसकी शीतल छाया भी शीतलता दे नहीं पाती..उसकी जगह ले लेती है दुर्गंध भरी वासना,,हवस और धन लोलुप्ता ...

शशांक के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ ...


अचानक एक पल में ही उसका हंसता खेलता परिवार ताश के पत्त्तो की तरह ढह गया ... ऐसी आँधी आई सब कुछ आँधी की तेज़ झोंको में उड़ गया ...

रह गया सिर्फ़ उसकी माँ का आँचल और उसकी बहेन की लाज़...


शशांक खुद 20 साल का जवान पर जीवन की लड़ाई में एक अबोध बच्चा .... माँ के आँचल को क्या मैला होने से बचा सका ..क्या अपनी बहेन की लाज़ की रक्षा कर सका ...????

दोस्तो इन सभी सवालों का जबाब धीरे धीरे मिलता रहेगा आने वाले अपडेट्स मे
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(ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना running.......).
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(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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jay
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Re: माँ का आँचल और बहन की लाज़

Post by jay » 12 Feb 2015 22:34

रात के करीब 10 बज चुके हैं....शिव-शांति के घर की लाइट्स बूझ चूकि हैं ....और सब अपने अपने कमरों में अपने में ही मस्त हैं .....


शिवानी नाइटी पहेने बेड पर लेटी है....आँखें बंद हैं ..पर उसकी कल्पना की दुनिया अभी भी पूरी तरेह खूली है... उसके ख़यालों में है शशांक ..उसका अपना चहेता , प्यारा और हँसमुख भाई ... उसके बारे सोचते सोचते ना जाने कब उसके दायें हाथ की उंगलियाँ नाइटी के अंदर से उसकी एक दम टाइट चूत के उपर पहुँच जाती है ...अपनी हथेली से उसे हल्के हल्के दबाती है ... दो तीन बार ...बाया हाथ सीने के अंदर घूसेड कर अपनी टेन्निस बॉल के साइज़ की चूचियों को भी हल्के हल्के दबाती जाती है ..."भैया ..ऊवू मेरे प्यारे भैया ...आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कब वो दिन आएगा ..तुम मुझे अपनी बाहों में भर लोगे....उफफफ्फ़ भाइय्या ..."

भैया की रट लगाते ही उसकी उंगलियाँ चूत पर तेज़ी से फिसलना चालू हो जाती हैं...उसकी टाँगें फैल जाती हैं ..चूत की फांके भी खूल जाती हैं ...और उंगलियाँ उस संकरे दरार के अंदर ही अंदर चूत के होंठों के बीच घीसती जाती है ...चूचियों का मसलना भी तेज़ हो जाता है... उसकी साँसें भी जोरों से चलती हैं ..."अया ..उउउहह भैया ..भैया ....." और फिर उसकी चूतड़ उछलती है ...चूत से पानी की धार फूट पड़ती है ....थोड़ी देर तक आँखें बंद किए लेटी रहती है ....टाँगे फैली ..दोनों हाथ भी फैले ....उसे अपने अंदर से पानी चूत से बाहर निकलता हुआ महसूस होता है ..एक अजीब हलकापन उसे महसूस होता है .....और इसी हालत में आँखें बंद किए नींद के झोंकों में खो जाती है ...

शशांक भी अपने कमरे में लेटा हुआ सोच रहा है ... उसके जहेन में शांति छायि है..उसकी माँ का चेहरा बार बार आता है..."माँ तुम इतनी सुंदर हो ...उफफफफ्फ़ पागल हो जाऊँगा ...माँ ...क्या वो दिन कभी आएगा जब तुम मेरी बाहों में होगी ...तुम्हारे आँचल की ठंडक मेरे बदन की गर्मी शांत करेगी.... माँ ..माँ ....मैं मर जाऊँगा माँ ...." और वो महसूस करता है उसके बॉक्सर के अंदर एक तंबू बना है... उसका 8 " पूरे का पूरा कड़क था ...शशांक करवट लेता है ..अपनी जांघों के बीच तकिया रख अपने कड़क लौडे से पिल्लो को जोरों से दबाता है ...तकिये के अंदर उसका लॉडा धँस जाता है ... काफ़ी देर तक इसी पोज़िशन में लौडे को रखता है ...फिर बॉक्सर के सामने के बटन खोल अपने हाथों से अपने लंड की चमड़ी तेज़ी से उपर नीचे करता है ... लंड और भी कड़क हो जाता है ..और फिर एक तेज़ पिचकारी छोड़ता हुआ झटके देता हुआ , कमर और चूतड़ उछालता हुआ झाड़ता जाता है ..

शशांक हांफता हुआ पड़ा रहता है ....आँखें बंद है ... और कुछ देर बाद वो नींद की आगोश में खो जाता है....



शिव और शांति अपने कमरे में लेटे हैं अगल बगल ...शांति शिव के दाहिने हाथ पर सर रखे लेटी है ...और शिव का बाया हाथ शाँति के कोमल बदन को सहला रहा है ....शांति आँखें बंद किए इस स्वर्गिक सूख का आनंद ले रही है ...शिव शांति को अपनी तरफ खींचता है ..दोनों आमने सामने हैं ..दोनों की साँसें एक दूसरे से टकरा रही हैं ...शिव उसके होंठों को चूमता है , अपनी एक टाँग उसकी टाँग के उपर रख ता है ...

" शांति ...." अपना सारा प्यार अपनी ज़ुबान में भर उस से बोलता है


" ह्म्‍म्म..जानू.... क्या...? " शांति उसके सीने पर अपना हाथ फिराते हुए पूछती है ..

" शांति .. " और ज़्यादा प्यार , और ज़्यादा मीठास है इस बार उसकी ज़ुबान में ...


" अरे बाबा कुछ बोलॉगे भी यह फिर मेरा नाम ही लेते रहोगे सारी रात ? " शांति हंसते हुए बोलती है

अब शिव अपना हाथ उसकी जांघों के बीच की दरार में रखता हुआ , उसकी चूत सहलाता है ..शांति कांप उठती है ..एक सीहरन सी होती है उसे


" शांति ..आज जो भी हूँ मैं सिर्फ़ तुम्हारी बदौलत ..तुम ना आती मेरी जिंदगी में ..मैं जाने क्या करता ..??" और यह कहते हुए उसे अपनी बाहों में जाकड़ लेता है और उसके होंठों को चूस्ता है ...

" उफ्फ तुम भी ना ..." शांति अपने होंठों को उस से अलग करती है और हान्फते हुए कहना जारी रखती है

" क्या करते .? अरे मेरी जगेह कोई दूसरी होती ...उस से भी ऐसी ही मीठी बातें करते .."

" नहीं शांति ..तुम जानती हो अच्छी तरेह कोई और तुम्हारी तरेह नहीं होती ..तुम लाखों में एक हो ...मैं खुश किस्मत हूँ तुम्हारे जैसी बीवी मुझे मिली .." और वो उसकी चूत जोरों से दबा देता है ...

" हाई ..क्या कर रहे हो जानू ... " और वो शिव से और भी करीब चिपक जाती है


" मैं भी तो कितनी खुशकिस्मत हूँ शिव ....तुम ने मुझे समझा और इतना प्यार दिया ...मुझे भी तो कोई और थोड़ी ना मिलता ..इतना प्यार करनेवाला ...."

"ह्म्‍म्म ..मैं तुम्हें क्या इतना प्यार करता हूँ ..??"


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Re: माँ का आँचल और बहन की लाज़

Post by jay » 12 Feb 2015 22:35

" ऑफ कोर्स जानू ..देखो ना यह तुम्हारा तंबू इस बात की गवाही दे रहा है ... " शांति उसके लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए कहती है ....उसका 7" लंड बिल्कुल कड़क था उसके पाजामे के अंदर ...मानो फुंफ़कार रहा हो बिल के अंदर जाने को...

दोनों एक दूसरे को देखते हैं ... एक टक ... और दोनों के हाथ चलते रहते हैं ...शिव शांति की चूत पर लगा है ..और शांति उसके लंड पर ... बातें बंद है ..सिर्फ़ सिसकारियाँ और साँसें चल रही हैं ...

इस दौरान दोनों के कपड़े कब बेड के नीचे आ जाते हैं ..किसी को पता नहीं ..दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से चीपके हैं ..एक दूसरे में समा जाने को बेताब ..


शांति की चूत गीली है ... शिव अपनी उंगलियाँ शांति की गीली चूत से बाहर निकालता है और चाट लेता है ...उसे देख शांति और भी मस्त हो जाती है ...और चूत और भी गीली हो जाती है . वो भी उसके लंड को अपने मुँह में भर उसके सुपाडे को जोरों से चूस्ति है .....शिव तड़प उठता है..मानो उसका पूरा रस शांति के मुँह में जानेवाला हो ..

वो उठ बैठता है ... शांति उसकी तरेफ देखती है ...शिव आँखों से इशारा करता है


शांति समझ जाती है उसे क्या करना है ..दोनों की अंडरस्टॅंडिंग इतनी अच्छी थी ..बोलने की ज़रूरत नहीं होती ..बस सिर्फ़ स्पर्श और आँखों की ज़ुबान चलती ..

शांति बेड से नीचे आ जाती है ...शिव उसे पीछे से जाकड़ लेता है ..उसका लंड उसके चूतड़ो के बीच धंसा है ...और दोनों हाथ से चूचियाँ मसल रहा होता है ..दोनों इसी पोज़िशन में आगे बढ़ते हैं और बेड से थोड़ी दूर जा कर रुक जाते हैं ..वहाँ एक स्टूल रखा है....शांति अपना एक पैर उस स्टूल पर रखती है ... उसकी चूत पूरी तरेह खूल जाती है ...थोड़ी सी आगे की ओर झूकती है ...चूत ख़ूलने में जो थोड़ी कसर थी ..अब वो भी नहीं है ...शिव का लंड उसके चूतड़ो के बीच से फिसलता हुआ उसकी चूत की फाँक पर आ जाता है ...

शिव अपने लंड को हाथों से थामता है ... और बुरी तरेह शांति की चूत की फांकों के बीच घिसता हुआ चूत के अंदर डाल देता है ..शांति आह भर लेती है ..मस्ती की किल्कारी लेती है ..उसका पूरा बदन कांप उठता है

शिव थोड़ा झूकता है ..उसकी कमर के गिर्द अपने हाथ रख उसे थामता हुआ जोरदार धक्का लगाता है ..पूरा लंड अंदर घुसाता है ..शांति इस प्रहार से अकड़ जाती है ..सारा शरीर झन्झना उठता है ..उसका बदन थरथरा उठता है ...

अब शिव लगातार धक्के लगाए जा रहा है..शांति सिसकारियाँ ले रही है..."उफफफ्फ़ ..जानू ..अया ....तुम भी ना ...उउउः और ज़ोर से ..हां मेरी जान ...आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह तुम्हारे जैसा लंड भी तो मुझे नहीं मिलता ...उफफफफफफफफफफफ्फ़ ..मैं मर गाईए .....आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह "

शिव उसकी सिसकारियों से और भी मस्ती में आ जाता है .. झूकते हुए हाथ नीचे कर उसकी चूहियाँ भी दबाने लगा ...निचोड़ने लगा ... शांति ने अपना चेहरा थोड़ा पीछे और उपर कर लिया ..शिव ने उसके होंठों को भी अपने होंठों से जाकड़ लिया .... हाथ कभी चूचियाँ मसलता तो कभी कमर जाकड़ लेता ..धक्के का ज़ोर बढ़ाता जाता ..थप..थप की आवाज़ों से कमरा गूँज़ रहा था ....जांघे और चूतड़ टकरा रहे थे ...और चूत और लंड में घनघोर मिलाप हो रहा था ....एक एक अंग उनका इस चुदाई में शामिल था ...

" आआह शांति ...शांति मेरी रानी ..मेरी जान ..आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कितना मज़ा है तेरे अंदर ..उफफफफफ्फ़ "


"हां मेरे राजा ..सब तुम्हारा ही तो है ..ले लो ना ..सब कुछ ले लो ..मैं तो निहाल हो गयी ...आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..उउउह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..हाआँ मेरे राजा ..हां ..बस और ज़ोर .....आआआआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .."

शिव समझ गया शांति अब झड़नेवाली है ..उसका भी झड़ना अब करीब ही था ..


उस ने अपना लंड अंदर डाले रखा और सीधा खड़ा हो गया ...शांति को भी सीधा कर एक दूसरे से चिपके बेड पर ले आया ....अब शांति को लिटा कर उसके उपर आ गया ..शांति ने अपनी टाँगें फैला दीं ...शिव ने अपना गीला लंड उसकी चूत में घूसेड दिया और उसे अपनी बाहों में जकड़ते हुए फिर से धक्के लगाना शूरू कर दिया ..हर धक्के में शांति उछल पड़ती .. और अब शिव ने अपने लंड को जड़ तक उसकी चूत में डालते हुए उसे बूरी तरेह अपने से चिपका लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा ...बस पागलों की तरेह चूमता जाता ..शांति भी अपनी बाहें उसकी गले के गिर्द डाल कर और भी चिपक गयी ..उसका लंड अंदर झटके खा रहा था ...शिव उसकी चूत में ही झाड़ रहा था ..शांति भी चूतड़ उछाल रही थी ..पानी लगातार निकल रहा था उसकी चूत से ....दोनों एक दूसरे से चिपके थे ..दोनों के शरीर और शरीर के रस एक दूसरे में समाए जा रहे थे ....

फिर शांति के सीने में शिव शांत हो कर अपना सर रख हांफता हुआ पड़ गया ....


शांति अपने हाथ उसके सर के पीछे रखते हुए उसके बालों को सहलाने लगी

" देखा ना ....कोई दूसरा कभी मुझे इतना प्यार देता ....??" शांति ने शिव की आँखों में झाँकते हुए कहा ....


शिव ने कुछ कहने की बजाय उसके होंठों को चूम लिया ...उसके सीने पर उसकी मुलायम चूचियों को महसूस करते हुए आँखें बंद किए मुस्कुराता हुआ पड़ा रहा ..

दोनों एक दूसरे की बाहों में पड़े पड़े कब नींद की गोद में चले गये ..पता नहीं ....

तो फ्रेंड्स कहानी का आगाज़ कैसा लगा ज़रूर बताना और मेरा साथ भी देना




Shashank ke pita Shiv Shankar Agrawal ka achha karobar thaa ....readymade kapdon ki achhee khasi outlet thee ...sabhi trendy brands unke yahan mil jaate ...unki dookan sheher ka jana maanaa landmark samjha jata ...45 varsh ki umra mein hi unhone kaphi paisa , daulat aur naam haaseel kar liya thaa ...

Shanti Shiv ki patni to thee hi par saath mein uske business mein bhi haath bataati...us ne purchase ka poora kaam sambhal rakha thaa ...uski pasand lajawab rehti.....unke dookan ki ek ek dress uske pasand ki hoti thee ... na sirf branded ...par desh bhar ki hastkala ke namoone bhi unki dookan mein milte... aur yeh sab Shanti sabhi jageh khud ja ja kar pasand karti aur apne dookan ke liye kharidti ...iske chalte unke dookan ki ek alag hi pehchan thee ...Shanti ne hi apni dookan ka bada satik slogan rakha thaa "

"SMILE WITH STYLE " .. unke dookan ka naam bhi "STYLE " hi thaa ..!


Kehna na hoga yehi slogan Shanti ne apne upar bhi hoo - ba - hoo utar rakha tha ...40 saal ki umra mein bhi unhone apne aap ko ek khoobsoorat sanche mein dhal rakha thaa ...sudaul choochiyan ... bhare bhare nitamb par kapdon ke andar hi halchal machati hui ... 5' 3" lambai ...ek prabhavshali vvyaktitwa ki swamini ...

hamesha muskurati , khilkhilati aur apne charon or ek khooshnooma mahaul paida karti hui ...uske aate hi mano charo or khushiyon ka ek laher jhoom uthta ... kaphi khoole veecharon wali ...

Shiv -Shanti donon ek doosre ke paripurak the ...har mamle mein ..unki sex life bhi kaphi lively thee ...


Itne busy life mein bhi unka sex life kaphi active thaa ...is maamle mein bhi un donon ki soch alag hi thee ...unke liye sex sirf lund aur choot ka milan nahin ..par sharir , dil deemag aur veecharon ka milan thaa ...

Shashank unka beta 20 saal ka bhara poora ... 6 foota jawaan thaa ...sports aur padhai mein awwal ...kaphi muscular body thee ... apni maan Shanti par jan cheedakta tha Shashank ...uske liye wo ek devi swaroop thee ..sundarta , sex aur uske sapnon ki devi...ek sampoorna aurat ...par uske man mein koi galat veechar nahin the ..uski kalpana mein agar uski koi premika aati to uski chavi uske maan jaisi hi hoti ...

Aur Shivani ki to baat hi alag thee ..ghar ki gudiya thee ..sab ke dil ki raani....18 saal ki madmast aur alhad ...jawaani ki dehliz par apne nape tule kadam rakhti hui ... kaphi slim par sahi jageh sahi ubhar ..apni .maan ki tareh hi sundar aur sudaul ....Shashank BHaiyaa par marti thee .... jaise Shashank apni maan par fida thaa Shivani apne Bhaiyaa par... Shashank ke samne use aur kuch nahin deekhta ...

Donon bhai -behen sheher ke hi ek college mein padhte ...


Shivshankar ka bhara poora , hara bhara pariwaar leh lahata thaa ..khushiyon ke jhonkon se jhoomta rehta ...

Raat ke karib 10 baj chooke hain....Shiv-Shanti ke ghar ki lights boojh chooki hain ....aur sab apne apne kamron mein apne mein hi mast hain .....


Shivani nighty pehene bed par leti hai....ankhein band hain ..par uski kalpana ki duniya abhi bhi poori tareh khooli hai... uske khayalon mein hai Shashank ..uska apna chaheta , pyara aur hansmukh bhai ... uske baare sochte sochte na jane kab uske dayein haath ki ungliyan nighty ke andar se uski ek dum tight choot ke upar pahoonch jaati hai ...apni hathelli se use halke halke dabati hai ... do teen bar ...bayan haath seene ke andar ghoosed kar apni tennis ball ke size ki choochiyon ko bhi halke halke dabati jati hai ..."Bhaiyya ..oooh mere pyaare Bhaiyya ...aah kab woh din aayega ..tum mujhe apni bahon mein bhar loge....uffff BHaiyya ..."

Bhaiyya ki rat lagate hi uski ungliyan choot par tezi se phisalna chaaloo ho jati hain...uski tangein phail jati hain ..choot ki phanke bhi khool jati hain ...aur ungliyan us sankre daraar ke andar hi andar choot ke honthon ke beech gheesti jati hai ...choochiyon ka masalna bhi tez ho jata hai... uski sansein bhi joron se chalti hain ..."AAAH ..uuuhh Bhaiyaa ..Bhaiyya ....." aur phir uski chootad uchaalti hai ...choot se paani ki dhaar phoot padti hai ....thodi der tak aankhein band kiye leti rehti hai ....tange phaili ..donon haath bhi phaile ....use apne andar se paani choot se bahar nikalta hua mehsoos hota hai ..ek ajeeb halkapan use mehsoos hota hai .....aur isi halat mein ankhein band kiye neend ke jhonkon mein kho jati hai ...

Shashank bhi apne kamre mein leta hua soch raha hai ... uske jehen mein Shanti chhaayi hai..uski maan ka chehra baar baar aata hai..."Maan tum itni sundar ho ...ufffff pagal ho jaoonga ...maan ...kya woh din kabhi aayega jab tum meri bahon mein hogi ...tumhare aanchal ki thandak mere badan ki garmi shant karegi.... maan ..maan ....main mar jaoonga maan ...." Aur woh mehsoos karta hai uske boxer ke andar ek tamboo bana hai... uska 8 " poore ka poora kadak thaa ...Shashank karwat leta hai ..apni janghon ke beech takiya rakh apne kadak laude se pillow ko joron se dabata hai ...takiye ke andar uska lauda dhans jata hai ... kaphi der tak isi position mein laude ko rakhta hai ...phir boxer ke samne ke button khol apne hathon se apne lund ki chamdi tezi se upar neeche karta hai ... lund aur bhi kadak ho jata hai ..aur phir ek tez peechkari chodta hua jhatke deta hua , kamar aur chootad uchaalta hua jhadta jata hai ..

Shashank hanfta hua pada rehta hai ....ankhein band hai ... aur kuch der baad woh neend ki aagosh mein kho jata hai....



Shiv aur Shanti apne kamre mein lete hain agal bagal ...Shanti Shiv ke dahine haath par sar rakhe leti hai ...aur Shiv ka bayan haath SHanti ke komal badan ko sehla raha hai ....Shanti ankhein band kiye is swargik sookh ka anand le rahi hai ...Shiv Shanti ko apni taraf kheenchta hai ..donon aamne samne hain ..donon ki sansein ek doosre se takra rahi hain ...Shiv uske honthon ko choomta hai , apni ek tang uske tang ke upar rakh ta hai ...

" Shanti ...." Apna saara pyaar apni juban mein bhar us se bolta hai


" Hmmm..jaanu.... kya...? " Shanti uske seene par apna haath phirate hue poochti hai ..

" Shanti .. " Aur jyada pyaar , aur jyada meethas hai is baar uski jubaan mein ...


" Are baba kuch bologe bhi yah phir mera naam hi lete rahoge saari raat ? " Shanti hanste hue bolti hai

Ab Shiv apna haath uski janghon ke beech ki daraar mein rakhta hua , uski choot sehlata hai ..Shanti kanp uthti hai ..ek seehran si hoti hai use


" Shanti ..aaj jo bhi hoon main sirf tumhari badaulat ..tum na aati meri jindagi mein ..main jaane kya karta ..??" Aur yeh kehte hue use apni bahon mein jakad leta hai aur uske honthon ko choosta hai ...

" Uff tum bhi na ..." Shanti apne honthon ko us se alag karti hai aur hanfte hue kehna jaari rakhti hai

" Kya karte .? are meri jageh koi doosri hoti ...us se bhi aisi hii meethi batein karte .."

" Nahin Shanti ..tum janti ho achhee tareh koi aur tumhari tareh nahin hoti ..tum lakhon mein ek ho ...main khush kismet hoon tumhare jaisi Biwi mujhe mili .." Aur woh uski choot joron se daba deta hai ...

" Hai ..kya kar rahe ho jaanu ... " Aur woh Shiv se aur bhi kareeb cheepak jati hai


" Main bhi to kitni khushkismet hoon Shiv ....tum ne mujhe samjha aur itna pyaar diya ...mujhe bhi to koi aur thodi na milta ..itna pyaar karnewala ...."

"Hmmm ..main tumhein kya itna pyaar karta hoon ..??"


" Of course jaanu ..dekho na yeh tumhara tamboo is baat ki gawahi de raha hai ... " Shanti uske lund ko apne haath se sehlate hue kehti hai ....uska 7" lund bilkul kadak tha uske pajame ke andar ...mano phunphkar raha ho bil ke andar jane ko...

Donon ek doosre ko dekhte hain ... ek tak ... aur donon ke haath chalte rehate hain ...Shiv Shanti ki choot par laga hai ..aur Shanti uske lund par ... batein band hai ..sirf siskariyan aur sansein chal rahee hain ...

Is dauran donon ke kapde kab bed ke neeche aa jaate hain ..kisi ko pata nahin ..donon ke nange badan ek doosre se cheepke hain ..ek doosre mein samaan jane ko betab ..


Shanti ki choot geeli hai ... Shiv apni ungliyan Shanti ki geeli choot se bahar nikaalta hai aur chaat leta hai ...use dekh Shanti aur bhi mast ho jati hai ...aur choot aur bhi geeli ho jati hai . woh bhi uske lund ko apne munh mein bhar uske supade ko joron se choosti hai .....Shiv tadap uthta hai..mano uska poora ras Shanti ke munh mein janewala ho ..

Woh uth baithta hai ... Shanti uski taref dekhti hai ...Shiv ankhon se ishaara karta hai


Shanti samajh jati hai use kya karna hai ..donon ki understanding itni achhee thee ..bolne ki jaroorat nahin hoti ..bas sirf sparsh aur ankhon ki juban chalti ..

Shanti bed se neeche aa jati hai ...Shiv use peeche se jakad leta hai ..uska lund uski chootadon ke beech dhansa hai ...aur donon haath se choochiyan masal raha hota hai ..donon isi position mein aage badhte hain aur bed se thodi door ja kar rook jate hain ..wahan ek stool rakha hai....Shanti apna ek pair us stool par rakhti hai ... uski choot poori tareh khool jati hai ...thodi si aage ki or jhookti hai ...choot khoolne mein jo thodi kasar thee ..ab woh bhi nahin hai ...Shiv ka lund uski chootadon ke beech se phisalta hua uski choot ki phank par aa jata hai ...

Shiv apne lund ko hathon se thamta hai ... aur boori tareh Shanti ki choot ki phankon ke beech gheesta hua choot ke andar daal deta hai ..Shanti aah bhar leti hai ..masti ki kilkari leti hai ..uska poora badan kanp uthta hai

Shiv thoda jhookta hai ..uski kamar ke gird apne haath rakh use thamta hua jordar dhakka lagata hai ..poora lund andar ghoosta hai ..Shanti is prahar se akad jati hai ..sara sharir jhanjhana uthta hai ..uska badan tharthara uthta hai ...

Ab Shiv lagatar dhakke lagaye ja raha hai..Shanti siskariyan le rahee hai..."Uffff ..jaanu ..aaah ....tum bhi na ...uuuh aur jor se ..haan meri jaaan ...aaah tumhare jaisa lund bhi to mujhe nahin milta ...uffff ..main mar gayeee .....aaaaaaaah "

Shiv uski siskariyon se aur bhi masti mein aa jata hai .. jhookte hue haath neeche kar uski choohiyan bhi dabane laga ...nichodne laga ... Shanti ne apna chehra thoda peeche aur upar kar liya ..Shiv ne uske honthon ko bhi apne honthon se jakad liya .... haath kabhi choochiyan masalta to kabhi kamar jakad leta ..dhakke ka jor badhta jata ..thap..thap ki awazon se kamra gunz raha tha ....janghein aur chotad takara rahe the ...aur choot aur lund mein ghanghor milap ho raha tha ....ek ek ang unka is choodai mein shamil tha ...

" AAh Shanti ...Shanti meri raani ..meri jaan ..aah kitna maza hai tere andar ..uffffff "


"Haan mere raja ..sab tumhara hi to hai ..le lo na ..sab kuch le lo ..main to nihaal ho gayee ...aaaaaah ..uuuhhh ..haaan mere raja ..haan ..bas aur jor .....aaaaaaaaaaaaaaah .."

Shiv samajh gaya Shanti ab jhadnewali hai ..uska bhi jhadna ab kareeb hi tha ..


Us ne apna lund andar dale rakhaa aur seedha khada ho gaya ...Shanti ko bhi seedha kar ek doosre se cheepke bed par le aaya ....ab Shanti ko leeta kar uske upar aa gaya ..Shanti ne apni tangein phaila deen ...Shiv ne apna geela lund uski choot mein ghoosed diya aur use apni bahon mein jakadte hue phir se dhakke lagana shooroo kar diya ..har dhakke mein Shanti uchal padti .. aur ab Shiv ne apne lund ko jad tak uski choot mein dalta hua use boori tareh apne se cheepka liya aur use betahasha choomne laga ...bas pagalon ki tareh choomta jata ..Shanti bhi apni bahein uski gale ke gird dal kar aur bhi cheepak gayee ..uska lund andar jhatke kha raha tha ...Shiv uski choot mein hi jhad raha tha ..Shanti bhi chootad uchaal rahee thee ..paani lagatar nikal raha tha uski choot se ....donon ek doosre se cheepke the ..donon ke sharir aur sharir ke ras ek doosre mein samaye jaa rahe the ....

Phir Shanti ke seene mein Shiv shant ho kar apna sar rakh hanfta hua pad gaya ....


Shanti apne haath uske sar ke peeche rakhte hue uske balon ko sehlane lagi

" Dekha na ....koi doosra kabhi mujhe itna pyaar deta ....??" Shanti ne Shiv ki ankhon mein jhankte hue kaha ....


Shiv ne kuch kehne ki bajai uske honthon ko choom liya ...uske seene par uski mulayam choochiyon ko mehsoos karte hue ankhein band kiye muskurata hua padaa raha ..

Donon ek doosre ki bahon mein pade pade kab neend ki god mein chale gaye ..pata nahin ....

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(ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना running.......).
(वक्त का तमाशा running)..
(ज़िद (जो चाहा वो पाया) complete).
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


Read my fev stories

(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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Re: माँ का आँचल और बहन की लाज़

Post by 007 » 13 Feb 2015 07:08

:P :P :P :P :P :P :P :P नई कहानी शुरू करने के लिए बधाई दोस्त :P :P :P :P :P :P :P :P :P :P
(¨`·.·´¨) Always

`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &

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Re: माँ का आँचल और बहन की लाज़

Post by jay » 13 Feb 2015 14:26

शिव-शांति के घर सुबह की पहली सुनेहरी किरणों के साथ एक सुनहरे दिन की शूरूआत होती है...

शिव अकेला बिस्तर पर पड़ा है...शांति के नशीले होंठों और मदमस्त चूत के रस के खुमार अभी भी है ....उसकी आँखें बंद है पर होंठों पर हल्की मुस्कुराहट .... और तभी शांति चाइ का ट्रे लिए उसके बगल बैठ ती है ....उसके होंठों पर अपने ताज़े ब्रश किए टूथ पेस्ट की तरोताज़ा सुगंध लिए होंठ रख देती है ....यह जानी पहचानी सुगंध शिव को आँखें खोलने का संकेत था ... उस ने आँखें खोली ..और शांति को अपनी बाहों मे ले लिया ....शाँति भी थोड़ी देर उसके सीने से लगी रही ... फिर सीने पर प्यार से मुक्के लगाती हुई उठ गयी ...

" उफफफफफफ्फ़..अब बस भी करो ना शिव... चलो उठो चाय पी लो ..मुझे बच्चों को भी चाइ देनी है ... बीचारे मेरा वेट करते होंगे .." और उसने ट्रे में रखी केटली से शिव के कप में चाइ भर दी और उसकी ओर बढ़ाया ...

शिव अभी भी अपने होंठों पर शांति के होंठों का स्वाद अपनी जीभ फिराते हुए ले रहा था


" शांति ... तुम्हारा यह टूथ पेस्ट बड़ा ही टेस्टी है यार ...पहले वाला इतना टेस्टी नहीं था ....बस एक बार और ..प्लीज़ .."

इतना कहते हुए शिव ने अपने एक हाथ से चाइ का प्याला थाम लिया और अपने होंठ शांति के होंठों पर रख उसे हल्के से चूसने लगा ....


" हद हो गयी ... तुम तो एक बच्चे से भी गये गुज़रे हो ... मैं कितने बच्चों को सम्भालूं ?? .." शांति ने झट से अपने आप को अलग किया ट्रे उठाया और कमरे से जाते जाते कह गयी.." यह टूथ पेस्ट मैने ख़ास तुम्हारे लिए ही लिया है.... "

शिव मुस्कुराता हुआ फिर से अपने होंठ पर जीभ फिरा रहा था....और साथ में गरमा गरम चाइ की चुस्कियाँ भी लेता जा रहा था....


शांति शशांक के कमरे के अंदर आ जाती है... और उसके बेड के बगल साइड-टेबल पर चाइ का कप रखते हुए उसे उठाती है ...

" गुड मॉर्निंग बेटा ....चलो उठो चाइ पी लो .. ठंडी हो जाएगी ... उठो शशांक ..."


शशांक आँखें मलते हुए उठता है....और उसकी नज़र अपनी खूबसूरत माँ पर पड़ती है ...चेहरा बिल्कुल फूलों की तरेह तरो-ताज़ा और चहकता हुआ ....उसका मन भी खिल उठता है ....

" गुड मॉर्निंग मोम ... एक बात पूछूँ ममा..???"


"हां बेटा पूछ ..पर जल्दी कर मुझे तेरी फटाके को भी चाइ देनी है ना ....पता नहीं उठ गयी हो और बस फूटने की तैय्यारि में ही होगी..."

फटाके के जिक्र से शशांक जोरों से हंस पड़ता है ..और पूरी तरेह जाग जाता है...


" हा हा हा.! ममा बस यही तो पूछना था ..आप हमेशा इस तरेह खुश रहती हो और खुशियाँ बीखेरती रहती हो... हाउ कॅन यू डू इट मोम ...और एक दो बार नहीं ..आइ ऑल्वेज़ सी यू स्माइलिंग ... आप की स्माइल कितनी मस्त है...सारा घर हंसता रहता है ..."

" अब इतने अच्छे बेटे और एक फाटका बेटी के होते हुए मैं तो हमेशा हँसती ही रहूंगी ना ..."


शांति ने बड़े टॅक्टफुली शशांक को जवाब दे दिया ....

" वाह मोम तुस्सी ग्रेट हो जी..सुबेह सुबेह इतनी तारीफ कर आप ने तो मेरा मुँह ही बंद कर दिया ..ठीक है जाओ और देखो तुम्हारी फटका बेटी क्या फटका छोड़ती है..."

शांति अपने सुबेह के आखरी और सब से मुसीबत वाली पड़ाव की ओर बढ़ती है... शिवानी अब तक सुबेह की गहमा गहमी और शांति की चहलकदमी से जाग गयी थी और आँखें बंद किए अपनी मोम का इंतेज़ार कर रही थी ... थोड़ा डिंमग गर्म भी हो रहा था ..."अब तक क्यूँ नहीं आई..???"

" उठ जा बेटा .... चाइ पी ले .." शांति ने उसकी तरफ चाइ का प्याला बढ़ाया ..


शिवानी ने मुँह फेर लिया ....


"जाओ मैं नहीं पीती छाई .." शिवानी ने गुस्से से कहा ...

" अले अले ..मेरी रानी बेटी सुबेह सुबेह इतनी गरम ..?? पर क्यूँ..??" शांति ने शिवानी के बाल सहलाते हुए उस से पूछा.


" और नहीं तो क्या ....मैं हू ना सब से बेकार ...सब को चाइ पीला दी और मैं कब से यहाँ पड़ी हूँ ....किसी को मेरा ख़याल भी है..?? "

" ओह कम ऑन शिवानी ऐसी बात थोड़ी है बेटी..मैं तो तेरे साथ चाइ पियूँगी .तभी तो तेरे पास सब से लास्ट में आई .." शांति ने मौके की नज़ाकत समझते हुए यह तीर फेंक दिया...

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