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Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग compleet

Posted: 14 Mar 2015 15:16
by jay
दोस्तो ननद की ट्रेनिंग page 01 to 34 का दूसरा पार्ट ननद ने खेली होली page 35 t0 39 भी आपके लिए पोस्ट कर रहा हूँ आशा करता हूँ आपको ये सीक्वल ज़रूर पसंद आएगा और अगर आप क्यूट कोमल की और भी होली की कहानियाँ पढ़ना चाहते हैं तो होली की सेक्सी कहानियाँ http://www.rajsharmastories.com/viewtop ... f=12&t=358 इस थर्ड मे पढ़ लें




ननद की ट्रैनिंग – भाग 1
(लेखिका रानी कौर)

छोट छोट जोबना दाबे में मजा देय,
ननदी हमारी, अरे बहना तुम्हारी चोदै में मजा देय।

मैं अपने सैयां के सामने अपनी ननद डाली के लिये ली, पिंक टीन-ब्रा लहराकर उन्हें छेड़ रही थी। वो ड्राईव कर रहे थे। उनके पैन्ट में उभरते बल्ज को सहलाते हुए मैं बोली- “अरे उसकी ब्रा देखकर ये हाल हो रहा है, तो अन्दर का माल देखोगे तो क्या हाल होगा?”

“अरे वो अभी छोटी है…” प्रोटेस्ट करते हुए वो बोले।

“छोटी है या तुम्हारा मतलब है कि उसका छोटा है। अरे पन्द्रह दिन रहोगे ना अबकी तो मसल-मसलकर मींज-मींज कर बड़ा कर देना। मेरा भी तो तुमने शादी के एक साल के अंदर ही 34सी से बढ़ाकर 36डी कर दिया था…” अदा से अपना जोबन उभारकर उन्हें ललचाते हुए, उनसे और सटकर मैं बोली।

हम लोग उनकी कजिन सिस्टर नीता (जो डाली की मझली बहन थी) की शादी के लिये शापिंग करके लौट रहे थे। हमें कल सुबह ही उनके ‘मायके’ शादी के लिये जाना था। मैंने अपनी ननद डाली के लिये, शादी के लिये कुछ बहुत सेक्सी रिवीलिंग ड्रेसेज़ ली थीं, उसी के साथ एक पुश-अप, स्किन टाईट लगभग पारदर्शी लेसी ब्रा भी ली थी और उन्हें दिखाकर पूछा- क्यों पसंद है?

वह बेचारे, उन्होंने समझा कि मेरे लिये है तो हँसकर कहा- “बहुत सेक्सी लगेगी…”

“और क्या गुड्डी के (डाली का घर का नाम गुड्डी था) उभार उभरकर सामने आएंगें…” मैंने उन्हें छेड़ा। और तब से मैं उन्हें छेड़ रही थी- “क्यों क्या याद आ रही है उसकी, सोचने से इत्ता तन्ना रहा है तो कल देखने पे क्या होगा? पर इसका दोष नहीं है, वह साली माल ही इत्ती मस्त है…” उनके जीन्स पे उभरे बल्ज को मैंने अपने लंबें नाखून से कसकर रगड़ते हुए, गाल से गाल सहलाकर बोला।

राजीव से अब नहीं रहा गया। उसने कसकर मेरे टाईट कुर्ते के ऊपर से मेरे निपल्स को पकड़कर खूब कसकर मसल दिया।

“उई आईई…” मैं चिल्लाई- “गलती करे कोई, भरे कोई। याद तुम्हें मेरी ननद के जोबन की आ रही है और मसले मेरे जा रहे हैं। पर कोई बात नहीं, कल पहुंच रहे हैं ना… मैं तुमसे अपनी ननद की चुदाई करवा के रहूंगी…”

तब तक गाड़ी ड्राईव-वे के अंदर घुस गयी थी। गाड़ी रोकते हुये राजीव ने मुझे कसकर पकड़ते हुए कहा- “अभी देखो ननद की चुदाई होती है या भाभी की?”

अभी रूम के अन्दर पहुंचकर मैंने सामान के पैकेट रखे भी नहीं थे की राजीव ने पीछे से कुर्ते के ऊपर से मेरे मस्त मम्मे कसकर पकड़ लिये।

मैं- “हे हे… बेडरूम में चलते हैं ना, क्यों बेसबरे हो रहे हो। माना अपने माल की याद आ रही है…”

पर राजीव को कहां सबर थी। एक हाथ से मेरे मम्मे कस-कस के मसल रहे थे और दूसरे से वह मेरी तंग शलवार का नाड़ा खोल रहे थे। पल भर में मेरी शलवार खुलकर मेरे घुटनों में फँस गयी थी और मेरा कुर्ता भी ब्रा के ऊपर उठ गया था। मैंने झुक कर अपने दोनों हाथ सोफे पे रख दिये थे, और मेरे कसे भारी नितंब उसकी जीन्स से बल्कि उसके खुंटे से रगड़ खा रहे थे। लग रहा था कि उसका बेताब हथियार उसकी जींस और मेरी पैंटी फाड़कर अंदर घुस जायेगा। उसका एक हाथ कस-कस के मेरी लेसी हाफ-ब्रा के ऊपर से ही मेरे मम्मे खूब कस-कस के मसल रहा था और दूसरा मेरी थांग पैंटी के ऊपर से, मेरे लव होंठों को सहला रहा था।

राजीव की यह बात मुझे बहुत पसंद थी। हमारी शादी के साल भर से थोड़ा ज्यादा ही हो गये थे, पर अभी भी वह कभी भी कहीं भी, ड्राईंग रूम, बाथरूम, किचेन, पोर्च में, कार में, सुबह, शाम, दिन दहाड़े, एकदम से मेरा दिवाना था। एक बार तो हम लोग उसके एक दोस्त के यहां गये थे, दो चार पेग ज्यादा लगा लिया और… उसी के यहां बाथरूम में मैं लाख ना नुकुर करती रही पर वह कहां छोड़ने वाला था। सप्ताहांत में तो अक्सर दो-दो दिन हम दोनों कपड़े ही नहीं पहनते थे, खाना बनाते, खाते, नहाते।

मेरी फ्रांट ओपेन ब्रा उसने खोल दी थी और मेरे कड़े खड़े गुलाबी निपल कसकर मसले जा रहे थे और अब मेरी पैंटी के अंदर उँगली मेरी गीली योनि के अंदर रगड़-रगड़ के जा रही थी। मैंने अपने मस्त नितंब उसके खूंटे पे रगड़ते हुये, छेड़ा- “अभी तो अपने माल के बारे में सोच के इसका ये हाल है। कल जब वह सामने पड़ेगी तो इसका क्या हाल होगा?”

राजीव- “कल की कल देखी जायेगी, अभी तो अपनी बचाओ…”

उसकी जींस और ब्रीफ अब नीचे उतर चुकी थी और एक झटके में उसने मेरी लेसी पैंटी भी नीचे सरका दी। अब उसका मोटा लण्ड सीधे मेरी गुलाबी फुदफुदाती बुर को रगड़ रहा था। उसने मेरे नीचे वाले दोनों गीले होंठों को फैलाकर, अपने पहाड़ी आलू ऐसे मोटे सुपाड़े को, सीधे फंसा दिया और कसकर एक बार मेरे निपल और क्लिट दोनों पिंच कर लिये।

“ऊईई…ई…ई…ई…” कुछ दर्द और कुछ मजे से मैं चिल्ला पड़ी।

पर उसे कुछ फर्क नहीं पड़ना था। उसने मेरी पतली कमर अब कसकर पकड़ी और एक बार में अपना पूरा मूसल कसकर ढकेल दिया।

उइई… मैं फिर चीख पड़ी। बिना वैसलीन के अभी भी लगता था। पर मुझे अब अपने चिढ़ाने की पूरी सजा मिलनी थी। उसने मेरा चेहरा खींचकर अपनी ओर किया और कसकर मेरे गुलाबी रसीले होंठ अपने होंठों में भींच लिये और एक बार फिर दोनों हाथों से कमर को पकड़कर कसकर धक्का मारा। चार पांच जबर्दस्त धक्कों के बाद अब पूरा अंदर था। थोड़ी ही देर में मैंने महसूस किया कि मेरी जुबान, उनकी जीभ से लड़ कर मजे ले रही है, और मेरे चूतड़ धीमे-धीमे आगे पीछे हो रहे हैं। मुझे भी अब खूब रस आने लगा था। मेरी चूत उनके लण्ड को हल्के-हल्के भींच रही थी।

Re: Nanad ki trening--ननद की ट्रैनिंग

Posted: 14 Mar 2015 15:16
by jay
उन्होंने अपना लण्ड सुपाड़े तक बाहर निकालकर फिर धीमे-धीमे, रस लेते हुये, मेरी कसी बुर में कसकर रगड़ते हुए, अन्दर पेलना शुरू किया। मजे में मेरी चूचियां कड़ी होकर पत्थर की तरह हो गयी थीं। एक हाथ से उन्होंने मेरे रसीले जोबन का रस लेना शुरू किया और दूसरे से मेरी मस्त होती क्लिट को कसकर छेड़ना शुरू किया।

उह्ह… उह्ह… उह्ह्ह… रस में मैं सिसक रही थी। अब मैं भी रह-रह के उनके लण्ड को अपनी चूत में कसकर सिकोड़ ले रही थी, और उनके हर धक्के का जवाब मेरे चूतड़ धक्के से दे रहे थे।

उनके धक्कों की रफ्तार भी धीरे-धीरे बढ़ रही थी, और थोड़ी ही देर में धका पेल चुदाई चालू हो गयी। ओह्ह… आह्ह… उफ्फ सटासट सटासट कभी वह जोर-जोर से आल्मोस्ट बाहर तक निकाल के पूरा एक झटके में अन्दर डाल देते और कभी पूरा अंदर घुसेड़कर वह सिर्फ धक्के देते कभी थोड़ा लण्ड बाहर निकालकर, मुठठी में पकड़कर कसकर मेरी बुर में गोल-गोल घुमाते। मेरी दोनों चूचियां कस-कस के अब रगड़ी, मसली जा रही थीं। कभी मस्ती में आकर मेरे भरे-भरे गुलाबी गालों को काट भी लेते। मैंने भी कसकर सोफे को पकड़ रखा था और खूब कस-कस के पीछे की ओर उनके धक्के के साथ धक्का लगाती। आधे घन्टे से भी ज्यादा फुल स्पीड में इस तरह चोदने के बाद जाकर वो कहीं झड़े।

मेरी हालत खराब थी। मैंने कुर्ते को ठीक करने की कोशिश की पर उन्होंने मुझे कपड़े पहनने नहीं दिया और उसी हालत में अपनी गोद में उठाकर बेडरूम में लेजाकर बेड पर लिटा दिया। खुद वो वहीं पेग बनाने लगे- “छोटा चाहिये या बड़ा?” मुझसे उन्होंने पूछा।

“मेरे लिये पटियाला बनाना…” शरारत से गोल-गोल आँखें नचाकर मैं बोली। और हां कल अपने मायके के लिये दो बड़ी बोतल, ओल्ड मांक और जिन की रख लेना।

“वहां किसके लिये?”

“तुम्हारी बहनों और मेरी छिनाल ननदों के लिये, उन्हें रमोला बनाकर और लिम्का में मिलाकर पिलाऊँगी और चूतड़ मटका मटकाकर नचवाऊँगी…”

“तुम्हारी गुड्डी के रसीले उभारों के नाम पर…” कहकर मैंने जाम टकरा कर चियर्स किया, और पेग खतम होते ही राजीव को अपने बगल में लिटा लिया। मैं उठकर उसकी टांगों के बीच में आधे खड़े लण्ड के पास गयी।

ओह्ह… मैंने अपने बारे में तो बताया ही नहीं, मैं 5’6” लम्बी, एकहरे बदन की पर गदरायी, गुदाज मांसल, गोरी हूं। मेरे काले लम्बे बाल मेरे नितम्बों तक आते हैं। मेरी फिगर 36डी-30-38 है और मेरे उभार बिना ब्रा के भी उसी तरह तने रहते है, और… वहां मैं कभी उसे ट्रिम रखती हूं और कभी सफाचट। और हां… वह अभी भी इत्ती कसी है ना कि ‘उन्हें’ उत्ती ही मेहनत करनी पड़ती है, जित्ती हनीमून में करनी पड़ती थी।

मैंने अपने घने लंबे काले बालों से उनके शिश्न को सहलाया और फिर उसे, अपने रेशमी जुल्फों में बांध कर प्यार से हल्के से सहलाया। थोड़ी ही देर में वह उत्तेजित हो उठा। पर मैं इत्ती आसानी से थोड़े ही छोड़ने वाली थी। मैंने अपने रसीले गुलाबी होंठों से धीरे-धीरे, उनके सुपाड़े से चमड़े को हटाया। सुपाड़ा, खूब मोटा, गुस्से से लाल कड़ा, लग रहा था। मैंने उसे पहले तो प्यार से एक छोटी सी चुम्मी दी और फिर जीभ से उसे हल्के-हल्के चाटना शुरू कर दिया।

उत्तेजना से राजीव की हालत खराब थी।

पर मैं कहां रुकने वाली थी। मैंने थोड़ी देर उसे अपने मस्त होंठों के बीच लेके लाली पाप की तरह चूसा और फिर जीभ की नोक उनके सुपाड़े के ‘पी-होल’ में घुसाकर उन्हें और तंग करना शुरू कर दिया। मैं जैसे उनके उत्तेजित लण्ड से बात कर रही होंऊँ, वैसे कहने लगी- “हे, बहुत मस्त हो रहे हो ना, कल तुम्हें एक नया माल दिलवाऊँगी, एकदम सेक्सी टीन माल है…”

“क्या बोल रही हो?” राजीव ने पूछा।

“तुम चुपचाप पड़े रहो, मैं अपने ‘इससे’ बात कर रही हूं, तुम्हारे मायके पहुंच कर इसे क्या मिलेगा, ये बता रही हूं…” मैं मुश्कुराकर बोली।

“अरे तुम गुड्डी के पीछे पड़ी रहती हो, वह अभी छोटी है, भोली है अभी तो इंटर में पहुंची है।

“चोर की दाढ़ी में तिनका, अरे मैंने उसका नाम तो लिया नहीं तुमने खुद कबूल कर लिया की वह माल वही है, और फिर ‘इंटर में पहुँची है’ इसका मतलब? इंटरकोर्स के लायक हो गयी है…”

Re: Nanad ki trening--ननद की ट्रैनिंग

Posted: 14 Mar 2015 15:17
by jay
उत्तेजना से मेरे दोनों जोबन और निपल्ल भी एकदम कड़े हो गये थे। उनके लण्ड को अपने रसीले जोबन के बीच करके दबाते हुये मैंने कहा। मस्ती से वह एकदम लोहे का खंभा हो रहा था। एक बार फिर मैंने अपने निपल से उनके सुपाड़े को छेड़ा और जैसे मैं चोद रही हूं, उनके थरथराते, पी-होल पे अपने निपल को डालकर रगड़ना शुरू कर दिया।

राजीव की हालत देखने लायक थी। उत्तेजना से वो कांप रहे थे और अपने चूतड़ ऊपर की ओर उछाल रहे थे।

मैं उनके ऊपर आ गयी और उनके दोनों हाथ कसकर पकड़कर, मैंने अपने निचले गुलाबी होंठ उनके मोटे सुपाड़े पर रगड़ना शुरू कर दिया। तभी, मुझे एक शरारत सूझी। मैंने उनके सुपाड़े का उपरी हिस्सा अपनी कसी योनि में लेकर हल्के से दबाया और अपने उभारों से उनके गाल को सहलाते हुए कहा- “मेरी एक शर्त है, अगर मैं शर्त जीत गयी…”

“हां हां तुम्हारी जो भी शर्त हो मंजूर है पर प्लीज़ करो ना…” उत्तेजना से उनकी हालत खराब थी।

मैंने थोड़ा और दबाव बढ़ाया और अब पूरा जोश में भरा सुपाड़ा मेरी चूत के अंदर था। मैंने कसकर उसे पूरी ताकत से चूत में भींचा, और उनके होंठों पर एक हल्की सी चुम्मी लेते हुए कहा- “शर्त है ये मेरे जानू, तुम्हारी ‘वो’ बड़ी भोली है ना… हां तो अगले पंद्रह दिनों में मैं उसे पक्की छिनार बना दूंगी और अगर मैंने उसे छिनार बना दिया तो तुम्हें उसे चोदना होगा…”

“हां हां जानम, तुम्हारी हर शर्त मुंझे मंजूर है पर पहले अभी तुम मुझे चोदो…” मस्ती में राजीव पागल हो रहे थे और उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था।

उनके दोनों हाथ कसकर पकड़कर मैंने अब पूरा जोर लगाया और अब उनके कुतुबमीनार पे, मेरी कसी चूत, रगड़ते, फिसलते, उतरने लगी। कुछ ही देर में उनका पूरा मोटा बित्ते भर का मूसल मेरे अंदर था। मैंने अब उसे हल्के से अपने निचले गुलाबी होंठों से स्क्वीज़ किया। उनकी नशे से अधमुदी पलकों पर चुम्मी लेकर उसे बंद किया और उनके सीने पे लेटकर कान की ललरी को धीरे से काट लिया। अपनी जीभ उनके कानों में सहलाते हुये मैंने कहा- “अब अगले 10 मिनट तक जैसे मैं तुम्हारा मायके वाला ‘वो माल’ हूँ, उस तरह करो…” और मैंने अपनी कमर, बिना उनका शिश्न जरा भी निकाले, गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया और उनका हाथ पकड़कर अपने रसीले जोबन पे रख दिया।

वह भी सिर्फ मेरे स्तनाग्रों को पकड़कर इस तरह हल्के-हल्के दबा रहे थे जैसे वह किसी टीनेजर की उभरती चूचियां हों।

मैं भी अब उसी मूड में आ गयी। धीरे-धीरे, अपनी कमर ऊपर उठाते हुये, सिसकते हुये जैसे मैं डाली हूं, वैसे बोल रही थी- “हां हां अच्छा लग रहा है ओह्ह… ओह्ह… बहुत मोटा है, लगता है…”

और वो भी सिर्फ मेरे जोबन के उपरी हिस्सों को दबाते, मसलते, रगड़ते, मेरी पतली कमर पकड़कर कभी अपने मोटे लण्ड के ऊपर करते और कभी नीचे। 10 मिनट तक चुदाई का हमने ऐसे ही मज़ा लिया। फिर अचानक राजीव ने मुझे पकड़कर नीचे लिटा दिया, और मेरी दोनों लम्बी गोरी टांगें कंधे तक मोड़कर, मुझे दोहरा कर दिया और इत्ती जोर से धक्का मारा की उसका सुपाड़ा, सीधे मेरी बच्चेदानी से जा टकराया।

“उह्ह्ह…” कुछ दर्द से कुछ मजे से मेरी चीख निकल गयी।

पर राजीव रुकने वाला नहीं था। उसने कसकर मेरी पत्थर सी कड़ी चूची के उपरी भाग में काटा।

“उउय्यी उय्यी…” मैं फिर चिल्लायी। पर उसने फिर मेरे निपल्स को मुँह में लेकर कसकर चुभलाना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियां कभी पूरी ताकत से मेरे निपल्स को पिंच करतीं और कभी क्लिट को फ्लिक करतीं। कभी वह अपना मूसल जैसा लण्ड बाहर निकालकर एक धक्के में पूरा अंदर घुसेड़ देता और कभी जड़ तक अंदर किये मेरी खड़ी, उत्तेजित क्लिट पर रगड़ता। मैं भी कस-कसकर अपने मोटे चूतड़ पटक रही थी। मैं पता नहीं कित्ती बार झड़ी पर वह एक घंटे उसी तरह चोदने के बाद ही झड़ा। उस रात दो बार मैंने और मूसल घोंटा, एक बार पीछे भी।

सुबह उनके ‘मायके’ चलते समय मैंने बैग में देखा तो ओल्ड मांक की दो बड़ी बोतलें और दो ज़िन की बोतलें रखी थीं। मैंने राजीव की ओर देखा तो वह आंखों में मुश्कुरा पड़ा और मैं भी। तभी मुझे “कुछ और स्पेशल गिफ्ट” याद आया।

और शरारत से मैं बोली- “राजीव, वो बोतल रख ली थी, गिफ्टपैक, तुम्हारी ‘उसके’ लिये…”

राजीव- “अभी रखता हूं…”

रात भर की थकान, कार में मैं सोती ही रही। जब मेरी ससुराल आने वाली थी, तभी मेरी नींद खुली। शहर के बाहरी हिस्से में वहां का रेड लाईट एरिया पड़ता था, कालीन गंज। वहां अभी भी कुछ रंडियां सज-धज के बैठी थीं। मैं उन्हें ध्यान से देख रही थी।

राजीव ने मुश्कुराकर कहा- “क्या, देख रही हो?”

“उसी को कहीं तुम्हारी बहन, तुम्हारा माल यहां तो नहीं है…”

राजीव कुछ जवाब देते उसके पहले हम लोग घर पहुँच गये।

जैसे ही झुक कर उन्होंने अपनी भाभी का पैर छूने की कोशिश की तो उन्होंने उन्हें चिढ़ाते हुये आशिवार्द दिया- “सदा सुहागिन रहो, दुधो नहाओ, पूतो फलो…”

और मुझसे बोलीं- “जरा अपनी उस ननद डाली का, इनके माल का कुछ इंतजाम करो…” मुझसे मुश्कुराकर मेरी जेठानी ने कहा।

“क्यों दीदी…” उनकी ओर चिढ़ाने वाली नजर डालते हुए, मैं बोली।

“अरे उसके चक्कर में, शहर में कैंडल और बैगन के दाम बढ़ गये हैं…” भाभी ने हँसकर कहा।

थोड़ी देर घर में रहकर हम लोग शादी के घर में गये। पहले ‘वही’ मिल गयी। एकदम ‘बेबी डाल’ लग रही थी, फ़्राक मेंम गोरी, छरहरी, छोटे-छोटे उभार, पतली कमर पर गजब ढा रहे थे। टीन, चिकने गुलाबी गालों पे लुनायी छा रही थी और किशोर नितंब भी गदरा रहे थे।

आंख नचाकर वो बोली- “भाभी, हम लोग आपका ही इंतज़ार कर रहे थे…”

“मेरा, या अपने भैया का? झूठी…” और उसके नमस्ते का जवाब उसे अपनी बांहों में भर के दिया- “भाभी से नमस्ते नहीं करते, गले मिलते हैं…” और उसके भैया को दिखाते हुये उसके उभारों को कसकर दबाकर पूछा- “बड़े गदरा रहे हैं, किसी से दबवाना शुरू कर दिया क्या?”

“धत्त, भाभी…” शरमाने से उसके गाल और गुलाबी लगने लगे। फ़्राक थोड़ी छोटी थी और उसकी गोरी जांघें साफ दिख रही थीं। नीचे, उसके फ़्राक के बीच में मैंने अपने हाथ से कसकर उसकी ‘गौरैया’ को दबोचकर, राजीव को सुनाते हुये छेड़ा- “इस बु… मेरा मतलब बुलबुल ने अभी तक चारा घोंटा की नहीं?”

“नहीं भाभी, कहां आपको मेरी तो फिकर ही नहीं…” हँसकर, अबकी उसने मजाक का जवाब देने की कोशिश की।

“चलो कोई बात नहीं, अबकी इंतज़ाम करवा दूंगी, पर तुम नखड़े मत करना…” यह कहते हुए मैंने ‘वहां’ कसकर मसल दिया। तब तक और लोग आ गये और हम लोग कमरे के अंदर पंहुच गये। हँसी मजाक चालू हो गया। मैंने जो गिफ्ट और ड्रेसेज सबके लिये ले आई थी दिखाना शुरू कर दिया।

Re: Nanad ki trening--ननद की ट्रैनिंग

Posted: 14 Mar 2015 15:18
by jay
दुल्हन के लिये ड्रेस के साथ मैचिंग लेसी ब्राइडल ब्रा सेट और डाली के लिये तो खास तौर पे सेक्सी और रिवीलिंग ड्रेसेज थीं। उसकी पुश-अप ब्रा दिखाते हुये मैंने कहा- “अरे ये तो तुम्हारे भैया की खास पसंद है…”

राजीव शरमा गये।

तभी मुझे कुछ ‘वो स्पेशल गिफ्ट’ याद आया और मैंने उनसे कहा- “हे, वो स्पेशल गिफ्ट जो आपके बैग में रखी है, निकालो ना…”

राजीव ने गिफ्ट-पैक बोतल निकाल के बढ़ायी।

“खोलो, इसको…” मैंने बोतल डाली की ओर बढ़ायी।

“क्या है इसमें भाभी?” डाली ने बड़ी उत्सुकता से पूछा।

“अरे, खोलकर ऊपर जो लिखा है पढ़ो ना…” मैं बोली।

वह भोली, उसने खोलकर पढ़ना शुरू किया- “सुडौल स्तनों के शीघ्र विकास के लिये, उन्नत और कसे-कसे आकर्षक वक्ष, लगाकर मालिश करें…” शर्मा कर वह रुक गयी।

“अपने भैया से मालिश करवाना दुगुना असर होगा…”

उसकी बड़ी बहन, जिसकी शादी थी, बोली- “भाभी, आप तो रोज करवाती होंगी?”

“और क्या तभी तो इत्ते बड़े हो गये हैं। पर तीन दिन की बात है, उसके बाद तो तुम्हारा मियां भी रोज मालिश करेगा, लौटकर आओगी तो चेक करूंगीं…” मैं बोली।

मैं चाहती थी की डाली के लिये जो शादी के दिन पहनने के लिये मैं ड्रेस लाई थी, वो एकदम टाईट फिट हो, इसलिये उसे उसके नाप से थोड़ा आल्टर करना पड़ेगा। मैंने उससे पूछा की वहां कोई अच्छा लेडीज टेलर है।
वह बोली- हां भाभी, एक है तो ‘बाबीज टेलर’ पर अब तो सिर्फ दो दिन ही ःैं और उसके पास कम से कम 7-8 दिन लगते हैं…”

‘बाबीज’ या बूब्ज? अरे मेरी इस प्यारी ननद के लिये तो कोई भी कुछ भी करने को तैयार हो जायेगा, तुम चलो मेरे साथ। मैं खुद कार ड्राईव करके उसके साथ निकली।

उसके घर के बाहर कुछ लड़के बैठे थे, एक ने फिकरा कसा- “रेशमा, जवान हो गयी, तीर कमान हो गयी…”
“अरे डाली, तेरे मुहल्ले के लड़कों को तेरा नाम भी नहीं मालूम, क्या बात है?” उनको सुनाते हुए मैंने उसे चिढ़ाया। रास्ते में मैंने उससे बोला की टेलर के यहां मैं जो कहूंगी वो उसे करना होगा और उसके कान में कुछ बोला।

पहले तो उसने बहुत ना नुकुर की फिर तैयार होकर कहा- “ठीक है भाभी, आप जो कहें…”

मैंने उसके चूचियां कसकर पिंच करते हुये कहा- “अरे बन्नो, अगर इसी तरह तुम मेरी सारी बातें मान लो ना तो देखना मैं तुम्हें कैसे जिंदगी के सारे मजे दिलवाती हूं…”

तब तक हम लोग बाबी टेलर्स के सामने पहुँच गये। खलील खान टेलर, पठान, खूब कसरती बदन। सामने पहुँचते ही डाली ने अदा से एक रस भरी अंगड़ाई ली और मुश्कुराकर मुझसे परिचय कराया- “मेरी भाभी…”

उसके देखते ही मेरा आंचल अपने आप ढलक गया और मुश्कुराकर उसे ठीक करते हुये मैंने उसे अपने जोबन का भरपूर दर्शन करा दिया। मुश्काराकर मैं बोली- “आप ही बूब… माफ कीजियेगा बाबी टेलर्स हैं? जिनकी इस शहर की सारी लड़कियां दीवानी हैं…”

“हां हां आपने सही फरमाया, बाबीज की टेलरिंग में ही तो असली कमाल है…”

“और इसीलिये तो हम आपके पास आये हैं। ये मेरी सेक्सी ननद, मैं चाहती हूं आपकी स्टाइल से ये ड्रेस ऐसी टाईट फिट हो जाये की ये शहर में आग लगा दे…” मैं बोली।

खलील- “चार्ज और कब तक देना होगा…”

“खलील भाई, चार्ज तो जो आप कहेंगें मैं उससे 100 रुपया ज्यादा दूंगीं और बाकी बातें बाद में… पहले आप इसकी नाप तो ले लीजिये। गुड्डी देख क्या रही हो जाओ चेंज रूम में…”

और गुड्डी बड़ी शोख अदा से खलील को देखते हुए चेंज रूम में चली गयी।

“आपके सिले हुए मैंने जो ड्रेसेज देखें है मैंने, क्या हाथ पाया है आपने मन करता है चूम लूं… एकदम सही फिट कटिंग परफेक्त। वैसे मैंने भी दिल्ली से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया है इसलिए मैं समझ सकती हूं, इस ड्रेस के साथ जो उसे ब्रा पहननी है ना, वह वही पहनकर आई है, और नाप ब्रा के ही ऊपर से लीजियेगा, जिससे ड्रेस खूब टाईट फिट आये, यही समझाने के लिये मैंने उसे हटा दिया है…” मैं झुक कर बात कर रही थी और मेरा आंचल पूरा अच्छी तरह से ढलक गया था और मेरे गहरे वी-कट गले वाली चाली से मेरे उभार साफ दिख रहे थे।

मैंने अपनी बात जारी रखी- “देखिये, इसके बेस से (मेरे हाथ अब मेरे उभार के बेस पे थे) सेंटर और दोनों (अब मेरे हाथ मेरे खड़े निपल्स पर थे) के बीच, जिससे उभार और गहराई दोनों… ओह सारी (अचानक मैंने आंचल को सम्हाला जैसे मेरा ध्यान उधर हो ही नहीं) आप समझ गये ना… आप तो खुद एक्स्पर्ट हैं…” और मैंने नीचे देखा तो उसका खूंटा तना था।

और मुझे वहां देखकर मुश्कुराता हुआ, खलील भी मुश्कारने लगा।

“अरे जाइये ना, मेरी ननद बिचारी इंतज़ार कर रही होगी। ठीक से अच्छी तरह से नाप ले लीजियेगा, हर जगह की…” पांच मिनट दस मिनट मैं सोच रही थी खलील नाप ले रहा है या?

पूरे पन्द्रह मिनट बाद वह बाहर निकला और उसके पीछे डाली। बाहर निकलकर उसके सामने ही उसने शर्माते हुये अपने टाप के बटन बंद किये।

मैं खलील को समझाने लगी की गला थोड़ा और गहरा पर डाली बोल उठी- “नहीं भाभी, बहुत हो जायेगा, एकदम खुला-खुला सा…”

खलील खुद बोला- “आप सही कह रही हैं पर अगर ये मना कर रही हैं…”

मैं उस समय तो मान गयी।

उसने कहा- हां और मैंने नीचे की भी नाप ले ली है, वहां भी थोड़ा टाईट कर दिया है, पर देना कब है?

जैसे ही मैंने कहा परसों तो वह उछल पड़ा- “अरे शादी का सीज़न है, मैं…”

पर उसकी बात काटते हुये मैंने कहा- “अरे आपने इत्ती अच्छी तरह उसकी नाप ले ली है, अब वह बेचारी कहां जायेगी? आपसे अच्छा तो कोई है नहीं। फिर आपने मुझे भाभी कहा है, इत्ती सी बात…”

तो बेचारा मान गया।

मैंने गुड्डी को चलने का इशारा किया और उसके जाते ही पर्स से ₹100 का एक पत्ता निकालकर उसको नजर करते हुये कहा- “और गहराई जैसा मैंने कहा था ना, वैसा ही बनाना। और तुम नीचे वाले के बारे में क्या कह रहे थे?”

“मैं वहां भी कह रहा था की कितना टाईट कर दूं…”

“पूरा, एकदम हिप हगिंग…”

जैसे ही मैं चलने लगी तो वो बोला- “भाभी जी आपको ब्लाउज नहीं सिलवाना?”

मैं मुड़कर बोली- “एकदम सिलवाना है, लेकिन अगर शादी में आपकी इस ड्रेस ने आग लगा दी ना तो अगले ही दिन मैं आऊँगी और हां मैं कभी-कभी ब्रा के बिना ब्लाउज़ पहनती हूं इसलिये नाप भी वैसे ही…”

बेचारा पठान का छोरा, खलील।

Re: Nanad ki trening--ननद की ट्रैनिंग

Posted: 14 Mar 2015 15:21
by jay
गाड़ी में पहुँचते ही गुड्डी ने मुझे पकड़कर कहा- “वाकई मान गये भाभी आपको, आपने तो कमाल कर दिया…”

“अरे, कमाल मैंने नहीं, इसने किया…” फिर उसकी चूचियों को कसकर पिंच करते हुए मैं बोली- “तुम इसकी महिमा जानती नहीं, सीख लो कब उभारना चाहिये, कब छिपाने की कोशिश करते हुए भोलेपन से लोगों की निगाह उधर खींचनीं चाहिये? जो औरतें बार-बार अपना आंचल ठीक करती हैं ना… वो वही करती हैं लोगों की निगाहों को दावत देती हैं। हाईड ऐंड सीक, थोड़ा छिपाओ, थोड़ा दिखाओ, कभी झुक के, कभी हल्के से दुपट्टा गिरा के, मुश्कुरा के, कुछ नहीं तो साईड से चूचियों का उभार दिखा के। अरे यार, जवानी आई है तो जोबन का उभार आया है, कुछ दिखा दोगी तो तुम्हारा तो कुछ घटेगा नहीं, उन बेचारों का दिन बन जायेगा…” टाप के ऊपर से उसके जोबन को हल्के से मसलते हुये मैंने कहा।

वह हल्के से मुश्कुरा दी।

“जानती हो डांस करते समय कैसे हीरोईनें इसको उभारती हैं…” अपनी मसल्स को उठाकर सीना कसकर उभारते हुए मैंने कहा- “देखो ऐसे अब तुम करो…”

उसने थोड़ा अपने किशोर उभारों को पुश किया। हम दोनों हँसने लगे।

“थोड़ा और हां… बस देखना, मैं तुम्हें ऐसे सिखा दूंगी ना कि तुम धक-धक में माधुरी दीक्षित को भी मात कर दोगी…” तब तक हम लोग घर पहुँच गये थे। गली के बाहर मैंने गाड़ी पार्क की और हम लोग बाहर निकले तो वो लड़के फिर खड़े थे और वो लंबा सा लड़का, जिसने फिकरा कसा था, ध्यान से देख रहा था।

मैंने गुड्डी से कहा- “दिखा दो आज इस बेचारे को भी उभार और तुम्हारा भी टेस्ट हो जायेगा…”

उसकी ओर देखकर गुड्डी ने अपने उभारों को पुश किया और ऐसी कटीली मुश्कान दी कि उस बेचारे को 440 वोल्ट का झटका लगा। हँसते हुए हम दोनों घर में पहुँचें। वहां शादी की रश्में शुरू होने वाली थी। हँसी मजाक गाली गाना, थोड़ी देर बाद हम दोनों ऊपर उसके कमरे में पहुँच गये, कमरे को खाली करके तैयार करने के लिये। शाम से और मेहमान आने वाले थे।

मैं उसकी किताबें हटा रही थी की एक के अंदर से एक चिट्ठी गिरी। मैंने पढ़ा तो किसी लड़के ने उसे लव लेटर लिखा था- “मेरा प्रेम पत्र पढ़ के नाराज ना होना, कि तुम मेरी जिंदगी हो, कि तुम मेरी…”

“हे भाभी प्लीज़, दे दीजिये ना चिट्ठी…” गुड्डी ने मेरे हाथ से छीनने की कोशिश की।

पर वह कहां सफल होती। उसे सुनाते हुए मैंने पूरी चिट्ठी पढ़ी और अपने ब्लाउज के अंदर छिपा लिया। और उसके शर्माते गालों पे कसकर चिकोटी काटते हुए मैंने कहा- “अरे, ये तो अच्छी बात है कि भौंरे लगने लगे। मैं तो सोच रही थी की मेरे ससुराल के सारे हिजडे या गांडू ही होते हैं जो मेरी ये प्यारी ननद अब तक अछूती बची है। कौन है बताओ ना?”

उसने बताया की ये वही लड़का है जो गली के बाहर था, और उसे देखकर बोल रहा था, 4-5 महीने से पीछे पड़ा है। पर उसने उसको कोई लिफ्ट नहीं दी है ना ही उसकी चिट्ठी का कोई जवाब दिया है, ऐसे ही है। तभी मेरी निगाह अल्मारी में लगे अखबार के नीचे पड़ी। वहां कुछ उभरा सा दिख रहा था।

मैंने उसे उठाया तो 5-6 और लेटर थे, मैंने सब कब्जे में कर लिये।

गुड्डी- “हे हे भाभी। मेरे हैं प्लीज दे दीजिये ना…” वह गिड़गिड़ाई।

ना, लेटर पढ़ते हुए मैं बोली- “चांदनी चांद से होती है सितारों से नहीं… मुहब्बत एक से होती है हजारों से नहीं… अच्छा तो जनाब शायर भी हैं, दे दो ना बिचारा इतना तड़प रहा है…”

गुड्डी- “भाभी प्लीज, दे दीजिये ना किसी को पता चल गया ना तो मैं बदनाम हो जाऊँगी…”

“पता तो चलेगा ही… मैं तुम्हारे भैया को और सबको बताती हूं, ये चक्कर…” मैं बनावटी गुस्से में बोली।

गुड्डी- “नहीं भाभी मेरा कोई चक्कर नहीं है, उसे मैंने आज तक एक लेटर भी नहीं लिखा। मैं म्यूजिक सीखने जहां जाती हूं, रास्ते में खेत पड़ता है। वहीं उसने अपनी कसम दिलाकर लेटर दिया था। मैंने उसे अपनी ओर से कोई लिफ्ट नहीं दी…” बेचारी रुंवासी हो गयी।

“अगर तुम चाहती हो की मैं किसी को ये बात न बताऊँ तो मेरी दो शर्तें हैं…” मैं उसी टोन में बाली।

गुड्डी- “क्या? मुझे मंजूर है। बस भाभी किसी को पता ना चले…”

“पहली शर्त ये है की तुम उस बेचारे के लेटर का जवाब भी दोगी और लिफ्ट भी और वह जो मांगेगा सब कुछ दोगी…” अब मेरे लिये मुश्कुराहट रोकना मुश्किल हो गया।

गुड्डी- “ठीक है और दूसरी?” बेचारी बोली।

उसके स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर उसकी जांघों के बीच चड्ढी पर कसकर दबोच कर रोबदार आवाज में मैंने कहा- “बहत्तर घंटे के अंदर इस चिड़िया को चारा घोंटना होगा वरना…”

गुड्डी- “जो हुकुम, पर किसके साथ?” अब मेरा मूड समझकर बेचारी के चेहरे पे मुश्कान आई।

“उं उं… कल तो तुम्हारे जीजा आ रहे हैं ना जीत और वैसे भी साली पे पहला हक तो जीजा का ही होता है…” उसकी चड्ढी के ऊपर से हल्के-हल्के मसलते हुये मैंने उसे खूब डिटेल में सुनाया कि मैं अपने कजिन की शादी में जब गयी थी, तो कैसे मेरे जीजा ने मेरे साथ आगे से, पीछे से और फिर जब दूसरे जीजा आ गये तो उन दोनों ने एक साथ आगे से, पीछे से, चूची के बीच, चेहरे पे (पूरी कहानी इट हैपेनड में पढें)। वह उत्तेजित्त हो गयी थी।

गुड्डी- “पर भाभी आप तो जानती हैं कि मैंने उन्हें होली में… तब से वह थोड़े…”

“अरे ये मुझ पे और इन पे छोड़ दो…” उसके उभारों को मैंने प्यार से सहलाते हुये कहा। तुम इनका जादू नहीं जानती। बस एक बार खुद अपने इन टीन गुलाबी गालों पे जीजा को किस्सी दे देना और उनका हाथ यहां पकड़ा देना फिर किस मर्द की हिम्मत है की मेरी इस प्यारी ननद को मना कर दे…”

उसने लेटर के लिये हाथ बढ़ाया, पर मैंने सारे लेटर अपने पर्स में रख लिये और कहा- “उंहूं… यहां ये ज्यादा सेफ हैं और जब तुम दोनों शर्तें पूरी करोगी तभी वापस मिलेंगें ये…”

गुड्डी- “भाभी, मेरी तो जान ही निकल गयी थी…” हँसकर वो बोली।

“अरे बुद्धू मैं तुम्हारी भाभी होने के साथ तुम्हारी सहेली भी हूं…” कहकर मैंने उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया, और अपनी चूचियों से उसके छोटे-छोटे जोबन दबा दिये। तब तक नीचे से राजीव की आवाज आई और मैं शाम को जल्दी आने का वादा करके घर वापस चल दी।